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Himanshi babra KATIB
usne do chaar kar diya mujhko
usne do chaar kar diya mujhko | उसने दो चार कर दिया मुझको
- Himanshi babra KATIB
उसने
दो
चार
कर
दिया
मुझको
ज़ेहनी
बीमार
कर
दिया
मुझको
क्यूँ
नहीं
दस्तरस
में
तू
मेरे
क्यूँ
तलबगार
कर
दिया
मुझको
कभी
पत्थर
कभी
ख़ुदा
उसने
चाहा
जो
यार
कर
दिया
मुझको
उस
सेे
कोई
सवाल
मत
करना
उसने
इंकार
कर
दिया
मुझको
एक
इंसान
ही
तो
माँगा
था
उसको
भी
मार
कर
दिया
मुझको
- Himanshi babra KATIB
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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जैसे
पतवार
सफ़ीने
के
लिए
होते
हैं
दोस्त
अहबाब
तो
जीने
के
लिए
होते
हैं
इश्क़
में
कोई
तमाशा
नहीं
करना
होता
अश्क
जैसे
भी
हों
पीने
के
लिए
होते
हैं
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Khalid Nadeem Shani
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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और
फिर
लोग
यही
कहते
फिरेंगे
इक
दिन
यार
कल
ही
तो
मेरी
बात
हुई
थी
उस
सेे
Saad Ahmad
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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अब
दोस्त
कोई
लाओ
मुक़ाबिल
में
हमारे
दुश्मन
तो
कोई
क़द
के
बराबर
नहीं
निकला
Munawwar Rana
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दुश्मनों
से
भी
दोस्ती
रक्खी
मैंने
हाथों
पे
ज़िंदगी
रक्खी
मेरे
हालात
चाहे
जो
भी
थे
तेरे
ख़ातिर
कभी
कमी
रक्खी
एक
लड़के
पे
ज़िंदगी
वारी
एक
लड़की
सदा
दुखी
रक्खी
हमने
तुझको
भुलाने
की
ख़ातिर
कैसे
कैसों
से
दोस्ती
रक्खी
मेरा
बर्बाद
होना
बनता
था
सब
सेे
पहले
तेरी
ख़ुशी
रक्खी
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मायूस
ज़िंदगी
से
तुझे
दर-किनार
कर
बैठी
हुई
हूँ
अपने
मुक़द्दर
से
हार
कर
मैं
कम-नसीब
उस
के
दिलासे
में
आ
गई
उस
ने
कहा
था
मुझ
से
मेरा
इंतिज़ार
कर
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आँख
को
आइना
समझते
हो
तुम
भी
सबकी
तरह
समझते
हो
दोस्त
अब
क्यूँ
नहीं
समझते
तुम
तुम
तो
कहते
थे
ना
समझते
हो
अपना
ग़म
तुमको
कैसे
समझाऊँ
सब
सेे
हारा
हुआ
समझते
हो
मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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बात
ऐसी
है
ऐसा
था
पहले
दर्द
होने
पे
रोता
था
पहले
जैसे
चाहे
वो
खेला
करता
था
मैं
किसी
का
खिलौना
था
पहले
तुझपे
कितना
भरोसा
करता
था
ख़ुद
पे
कितना
भरोसा
था
पहले
आख़िरी
रास्ते
पे
चलने
को
पैर
उसने
उठाया
था
पहले
अब
तो
तस्वीर
तक
नहीं
बनती
मैं
तो
पैकर
बनाता
था
पहले
रौशनी
आई
जब
जला
कोई
सबकी
आँखों
पे
पर्दा
था
पहले
गिनती
पीछे
से
की
गई
वरना
मेरा
नंबर
तो
पहला
था
पहले
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सबने
दिल
से
उसे
उतारा
था
वो
मरी
कब
थी
उसको
मारा
था
पैरों
में
गिरके
जीता
था
जिसको
उसको
पाने
में
ख़ुदको
हारा
था
तेरे
मेरे
में
बट
गया
सबकुछ
एक
टाइम
था
सब
हमारा
था
उसकी
यादों
में
दिल
जले
है
अब
जिसका
चेहरा
नहीं
गवारा
था
मैंने
वो
खोया
जो
मेरा
नहीं
था
तुमने
वो
खोया
जो
तुम्हारा
था
जीत
सकता
था
उस
सेे
मैं
कातिब
पर
बड़े
हौसले
से
हारा
था
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