ajeeb karb-o-bala ki hai raat aankhoñ men | अजीब कर्ब-ओ-बला की है रात आँखों में

  - Haidar Qureshi
अजीबकर्ब-ओ-बलाकीहैरातआँखोंमें
सिसकतीप्यासलबोंपरफ़ुरातआँखोंमें
तुम्हेंतोगर्दिश-ए-दौराँनेरौंदडालाहै
रहीकोईभीपहलीसीबातआँखोंमें
क़तार-वारसितारोंकीजगमगाहटसे
सजाकेलाएहैंग़मकीबरातआँखोंमें
फिरउसकोदामनदिलमेंकहाँकहाँरक्खें
समेटसकतेहैंजोकाएनातआँखोंमें
बिखरगएहैंमिलनकेतमामदिन'हैदर'
ठहरगईहैजुदाईकीरातआँखोंमें
  - Haidar Qureshi
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