do-chaar gaam paas-e-rifaqat na kar sake | दो-चार गाम पास-ए-रिफ़ाक़त न कर सके

  - Hafeez Shahid
दो-चारगामपास-ए-रिफ़ाक़तकरसके
हमफिरभीउनसेकोईशिकायतकरसके
क्याऐसेहम-सफ़रपेभरोसाकरेकोई
जोदिलकोभीशरीक-ए-मसाफ़तकरसके
इंसाँकाएहतिरामथाइतनाहमेंअज़ीज़
हमअपनेदुश्मनोंसेभीनफ़रतकरसके
हमलोगतोकुछऐसेक़दामत-परस्तहैं
पैदाकिसीभीकाममेंजिद्दतकरसके
चुनतेहोऐसाक़ाफ़िलासालारकिसलिए
जोअहल-ए-कारवाँकीहिफ़ाज़तकरसके
हमऐसेहुक्मरानथेबे-इख़्तियारसे
इसदिलकीसल्तनतपेहुकूमतकरसके
नाराज़हमसेहैंवोहमारेसुकूतपर
लबखोलनेकीख़ुदभीजोहिम्मतकरसके
'शाहिद'दयार-ए-दिलमेंअँधेराहैचारसू
रौशनकोईचराग़-ए-मोहब्बतकरसके
  - Hafeez Shahid
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy