kabhi shu'ur kabhi dil kabhi sukhun mahke | कभी शुऊ'र कभी दिल कभी सुख़न महके

  - Gauhar Usmani
कभीशुऊ'रकभीदिलकभीसुख़नमहके
कहोवोशे'रकिदुनिया-ए-फ़िक्र-ओ-फ़नमहके
अताहमेंभीजोहोजाए'मीर'काअंदाज़
तोलफ़्ज़लफ़्ज़सेमा'नीकापैरहनमहके
रहूँख़मोशतोफूलोंकोनींदजाए
पढ़ूँजोशे'रतोलफ़्ज़ोंकाबाँकपनमहके
लरज़तेहोंटोंकीवोगुफ़्तुगूतोयादनहीं
बसइतनायादहैबरसोंलब-ओ-दहनमहके
दबीहुईहैजोसदियोंसेग़मकीचिंगारी
भड़कउठेतोख़यालोंकीअंजुमनमहके
कभीतोऐसाज़मानाभीआए'गौहर'
मोहब्बतोंकीफ़ज़ासेमिरावतनमहके
  - Gauhar Usmani
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