haqeeqaton se kabhi inhiraf mat kijeye | हक़ीक़तों से कभी इंहिराफ़ मत कीजे

  - Gauhar Usmani
हक़ीक़तोंसेकभीइंहिराफ़मतकीजे
क़ुसूरजिसकाहोउसकोमुआ'फ़मतकीजे
किसीबुज़ुर्गकेचेहरेपेकुछनहींलिक्खा
अदबतोकीजिएउसकातवाफ़मतकीजे
ख़ताहोआपकीतोकीजिएइसेतस्लीम
ख़ताहोतोकभीए'तिराफ़मतकीजे
मुआहिदाहोतअ'ल्लुक़होइंकिसारीहो
कभीमिज़ाजकेअपनेख़िलाफ़मतकीजे
वोघरकाराज़होयादोस्तोंकीबातेंहों
किसीपेउनकाकभीइंकिशाफ़मतकीजे
ग़ज़लइशारोंकिनायोंकानामहै'गौहर'
ग़ज़लमेंबातकोईसाफ़साफ़मतकीजे
  - Gauhar Usmani
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