tira husn hai vo sahaba ki koi misaal kya de | तिरा हुस्न है वो सहबा कि कोई मिसाल क्या दे

  - Gauhar Usmani
तिराहुस्नहैवोसहबाकिकोईमिसालक्यादे
कभीतिश्नगीबुझादेकभीतिश्नगीबढ़ादे
येजहाँहैइकतमाशाकोईदोस्तहैदुश्मन
वहीआगरौशनीदेवहीआशियाँजलादे
येतरीक़-ए-दिलबरीहैकिअदा-ए-दिल-नवाज़ी
किसीजुर्मपरनवाज़ेकिसीजुर्मपरसज़ादे
अभीज़ुल्मत-ए-ख़िरदमेंहैवफ़ाकीताबनाकी
येचराग़बुझजाएकोईइसकीलौबढ़ादे
येक़दमक़दमपेज़ुल्मतयेरविशरविशअँधेरे
मिरीबे-ख़ुदीकहाँहैमुझेरास्ताबतादे
येतसव्वुर-ए-रिहाईरहेक्यूँँनज़रमें'गौहर'
मुझेक़ैदकरनेवालेमिरेबाल-ओ-परजलादे
  - Gauhar Usmani
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