kabhi shaadmaan kabhi pur-alam tumhein yaad ho ki na yaad ho | कभी शादमाँ कभी पुर-अलम तुम्हें याद हो कि न याद हो

  - Gauhar Usmani
कभीशादमाँकभीपुर-अलमतुम्हेंयादहोकियादहो
वोकरमकेरूपमेंइकसितमतुम्हेंयादहोकियादहो
वहीअहद-ए-रस्म-ओ-रह-ए-वफ़ावोदिल-ओ-नज़रकामोआ'मला
मुझेयादहैमिरेमोहतरमतुम्हेंयादहोकियादहो
वहीग़ुंचाग़ुन्चा-ओ-गुल-ब-गुलवहीरुख़-ब-रुख़वहीदिल-ब-दिल
कभीथेचमनकीबहारहमतुम्हेंयादहोहोकियादहो
वोफ़ुसूँ-तराज़सीइकनज़रकभीमुंतज़िरकभीमुंतज़िर
वोफ़साना-साज़शब-ए-अलमतुम्हेंयादहोकियादहो
कभीवोतबस्सुम-ए-ज़ेर-ए-लबकभीख़ामुशीसीवोबे-सबब
कभीसर
ख़ुशीकभीआँखनमतुम्हेंयादहोकियादहो
  - Gauhar Usmani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy