zamaane bhar ko nayi taab-o-tab dikha na sake | ज़माने भर को नई ताब-ओ-तब दिखा न सके

  - Gauhar Shaikh Purwi
ज़मानेभरकोनईताब-ओ-तबदिखासके
वोशख़्सक्याजोग़मोंमेंभीमुस्कुरासके
हमअपनेशहरमेंरहतेहैंअजनबीकीतरह
मगरयेबातकिसीकोभीहमबतासके
गुज़रतेवक़्तकीमानिंदहैआजकाइंसाँ
सदाएँदेकेउसेहमकभीबुलासके
ज़रूररंजिश-ए-बेजाहैआपकोहमसे
मिलेगलेसेमगरदिलकभीमिलासके
तुम्हारेवा'देहसींभीथेदिल-फ़रेबभीथे
हमारेघरसेग़रीबीमगरहटासके
जोबख़्शतेरहेदुनियाकोनूरकीदौलत
वोअपनेघरमेंकोईशम्अतकजलासके
रहेहैं'गौहर'-ए-नायाबकीतरहलेकिन
हमअपनेआपकोशोकेसमेंसजासके
  - Gauhar Shaikh Purwi
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