kabhi daraaye kabhi KHud hi darne lagti hai | कभी डराए कभी ख़ुद ही डरने लगती है

  - G. R. Vashishth
कभीडराएकभीख़ुदहीडरनेलगतीहै
हयातहरकत-ए-अतफ़ालकरनेलगतीहै
मैंतंगकेजहाँसेजोदेखताहूँतुझे
मेरीनज़रकीथकावटउतरनेलगतीहै
मेरीरगोंमेंलहूशोरबनकेदौड़ताहै
मेरेलबोंपेख़मोशीठहरनेलगतीहै
मैंअपनेकमरेमेंसिगरेटपीतारहताहूँ
धुआँधुआँतेरीसूरतउभरनेलगतीहै
वोजिसगलीसेगुज़रताहैउसगलीकीख़बर
तमामगलियोंसेहोकरगुज़रनेलगतीहै
किसीकीरूहकोदिलसेलगाएरहताहूँ
किसीकेजिस्मकीचाहतमुकरनेलगतीहै
  - G. R. Vashishth
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