Republic Day Shayari
Best

Republic Day Shayari

दौलतनाअताकरनामौला,शोहरतनाअताकरनामौला
बसइतनाअताकरनाचाहेजन्नतनाअताकरनामौला
शम्मा-ए-वतनकीलौपरजबकुर्बानपतंगाहो
होंठोंपरगंगाहो,हाथोंमेंतिरंगाहो
होंठोंपरगंगाहो,हाथोंमेंतिरंगाहो
बसएकसदाहीसुनेंसदाबर्फ़ीलीमस्तहवाओंमें
बसएकदु'आहीउठेसदाजलते-तपतेसेहराओंमें
जीते-जीइसकामानरखें
मरकरमर्यादायादरहे
हमरहेंकभीनारहेंमगर
इसकीसज-धजआबादरहे
जन-मनमेंउच्छलदेशप्रेमकाजलधितरंगाहो
होंठोंपरगंगाहो,हाथोंमेंतिरंगाहो
होंठोंपरगंगाहो,हाथोंमेंतिरंगाहो
गीताकाज्ञानसुनेनासुनें,इसधरतीकायशगानसुनें
हमसबद-कीर्तनसुननासकेंभारतमांकाजयगानसुनें
परवरदिगार,मैंतेरेद्वार
परलेपुकारयेआयाहूँ
चाहेअज़ाननासुनेंकान
परजय-जयहिन्दुस्तानसुनें
जन-मनमेंउच्छलदेशप्रेमकाजलधितरंगाहो
होंठोंपरगंगाहो,हाथोंमेंतिरंगाहो
होंठोंपरगंगाहो,हाथोंमेंतिरंगाहो
Read Full
Kumar Vishwas
Share
66 Likes
चिश्तीनेजिसज़मींमेंपैग़ाम-ए-हक़सुनाया
नानकनेजिसचमनमेंवहदतकागीतगाया
तातारियोंनेजिसकोअपनावतनबनाया
जिसनेहिजाज़ियोंसेदश्त-ए-अरबछुड़ाया
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
यूनानियोंकोजिसनेहैरानकरदियाथा
सारेजहाँकोजिसनेइल्महुनरदियाथा
मिट्टीकोजिसकीहक़नेज़रकाअसरदियाथा
तुर्कोंकाजिसनेदामनहीरोंसेभरदियाथा
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
टूटेथेजोसितारेफ़ारसकेआसमाँसे
फिरताबदेकेजिसनेचमकाएकहकशाँसे
वहदतकीलयसुनीथीदुनियानेजिसमकाँसे
मीर-ए-अरबकोआईठंडीहवाजहाँसे
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
बंदेकलीमजिसकेपर्बतजहाँकेसीना
नूह-ए-नबीकाकरठहराजहाँसफ़ीना
रिफ़अतहैजिसज़मींकीबाम-ए-फ़लककाज़ीना
जन्नतकीज़िंदगीहैजिसकीफ़ज़ामेंजीना
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
Read Full
Allama Iqbal
Share
18 Likes
येदाग़दाग़उजाला,येशबगज़ीदासहर
वोइन्तज़ारथाजिसका,येवोसहरतोनहीं
येवोसहरतोनहींजिसकीआरज़ूलेकर
चलेथेयारकिमिलजायेगीकहींकहीं
फ़लककेदश्तमेंतारोंकीआख़रीमंज़िल
कहींतोहोगाशब-ए-सुस्तमौज्कासाहिल
कहींतोजाकेरुकेगासफ़िना-ए-ग़म-ए-दिल
जवाँलहूकीपुर-असरारशाहराहोंसे
चलेजोयारतोदामनपेकितनेहाथपड़े
दयार-ए-हुस्नकीबे-सब्रख़्वाब-गाहोंसे
पुकारतीरहींबाहें,बदनबुलातेरहे
बहुतअज़ीज़थीलेकिनरुख़-ए-सहरकीलगन
बहुतक़रींथाहसीनान-ए-नूरकादामन
सुबुकसुबुकथीतमन्ना,दबीदबीथीथकन
सुनाहैहोभीचुकाहैफ़िरक़-ए-ज़ुल्मत-ए-नूर
सुनाहैहोभीचुकाहैविसाल-ए-मंज़िल-ओ-गाम
बदलचुकाहैबहुतअहल-ए-दर्दकादस्तूर
निशात-ए-वस्लहलाल-ओ-अज़ाब-ए-हिज्र-ए-हराम
जिगरकीआग,नज़रकीउमंग,दिलकीजलन
किसीपेचारा-ए-हिज्राँकाकुछअसरहीनहीं
कहाँसेआईनिगार-ए-सबा,किधरकोगई
अभीचिराग़-ए-सर-ए-रहकोकुछख़बरहीनहीं
अभीगरानि-ए-शबमेंकमीनहींआई
नजात-ए-दीद-ओ-दिलकीघड़ीनहींआई
चलेचलोकिवोमंज़िलअभीनहींआई
Read Full
Faiz Ahmad Faiz
Share
12 Likes

LOAD MORE

How's your Mood?

Latest Blog