chishti ne jis zameen men paigham-e-haq sunaaya | चिश्ती ने जिस ज़मीं में पैग़ाम-ए-हक़ सुनाया

  - Allama Iqbal
चिश्तीनेजिसज़मींमेंपैग़ाम-ए-हक़सुनाया
नानकनेजिसचमनमेंवहदतकागीतगाया
तातारियोंनेजिसकोअपनावतनबनाया
जिसनेहिजाज़ियोंसेदश्त-ए-अरबछुड़ाया
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
यूनानियोंकोजिसनेहैरानकरदियाथा
सारेजहाँकोजिसनेइल्महुनरदियाथा
मिट्टीकोजिसकीहक़नेज़रकाअसरदियाथा
तुर्कोंकाजिसनेदामनहीरोंसेभरदियाथा
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
टूटेथेजोसितारेफ़ारसकेआसमाँसे
फिरताबदेकेजिसनेचमकाएकहकशाँसे
वहदतकीलयसुनीथीदुनियानेजिसमकाँसे
मीर-ए-अरबकोआईठंडीहवाजहाँसे
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
बंदेकलीमजिसकेपर्बतजहाँकेसीना
नूह-ए-नबीकाकरठहराजहाँसफ़ीना
रिफ़अतहैजिसज़मींकीबाम-ए-फ़लककाज़ीना
जन्नतकीज़िंदगीहैजिसकीफ़ज़ामेंजीना
मेरावतनवहीहैमेरावतनवहीहै
  - Allama Iqbal
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