kuchh baat nahin jism agar meraa jala hai | कुछ बात नहीं जिस्म अगर मेरा जला है

  - Fakhr Zaman
कुछबातनहींजिस्मअगरमेराजलाहै
सद-शुक्रकिउसबज़्मसेशोलातोउठाहै
मानाकिमिरेलॉनकीफिरसब्ज़हुईघास
इसमेंहमेंपड़ोसीकामकाँभीतोगिराहै
सर्दीहैकिइसजिस्मसेफिरभीनहींजाती
सूरजहैकिमुद्दतसेमिरेसरपरखड़ाहै
हरसम्तख़मोशीहैमगरकहतेहैंकुछलोग
इसशहरमेंइकशोरक़यामतकाबपाहै
दीवारसेगोईंटखिसककरपड़ीसरपर
सद-शुक्रकिरौज़नकोईज़िंदाँमेंखुलाहै
अबदेखिएकिसराहमेंदीवारबनेगा
ढलवानपेइकसंग-ए-गिराँचलतोपड़ाहै
इससालमिरेखेतमेंओलेभीपड़ेहैं
इससालमिरीफ़स्लकोकीड़ाभीलगाहै
आँखेंमिरीरौशनरहेंख़ुश-हालरहूँमैं
इकअंधीभिकारनकीमिरेहक़मेंदु'आहै
मैंभूकसेबेहालहूँतोसेर-शिकमहै
क्यामेराख़ुदावोनहींजोतेराख़ुदाहै
  - Fakhr Zaman
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