jo dhoop ki taptee hui saanson se bachi soch | जो धूप की तपती हुई साँसों से बची सोच

  - Fakhr Zaman
जोधूपकीतपतीहुईसाँसोंसेबचीसोच
फिरचाँदनी-रातोंमेंबड़ीदेरजलीसोच
आरामसेइकलम्हाभीजीनानहींमुमकिन
हरवक़्तमिरेज़ेहनमेंरहतीहैनईसोच
इसशहरमेंआताहैनज़रहरकोईअपना
आवाज़किसेदूँमुझेरहतीहैयहीसोच
दुख-दर्दकामाराहीकोईसमझेगाहमको
हमतकपहुँचपाएगीनाज़ोंकीपलीसोच
  - Fakhr Zaman
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