bahaaduri jo nahin hai to buzdili bhi nahin | बहादुरी जो नहीं है तो बुज़दिली भी नहीं

  - Fakhr Zaman
बहादुरीजोनहींहैतोबुज़दिलीभीनहीं
बहुतहीचाहामगरहमसेख़ुद-कुशीहुई
कुछइसतरहसेख़यालोंनेरौशनीबख़्शी
तुम्हारीज़ुल्फ़भीबिखरीतोतीरगीहुई
किसीकेदर्दकोतुमजानतेभलाक्यूँँकर
ख़ुदअपनेदर्दसेजबतुमकोआगहीहुई
वोतीरगीथीमुसल्लतफ़ज़ा-ए-आलमपर
लहूकेदीपजलेफिरभीरौशनीहुई
मैंजीरहाहूँदिल-ए-मुर्दालेकेसीनेमें
इसेतोमौतकहोयेतोज़िंदगीहुई
  - Fakhr Zaman
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