lamhon ka bhanwar cheer ke insaan banaa hooñ | लम्हों का भँवर चीर के इंसान बना हूँ

  - Fakhr Zaman
लम्होंकाभँवरचीरकेइंसानबनाहूँ
एहसासहूँमैंवक़्तकेसीनेमेंगड़ाहूँ
कहनेकोतोहरमुल्कमेंघूमाहूँफिराहूँ
सोचूँतोजहाँथावहींचुप-चापखड़ाहूँ
फ़ुटपाथपेअर्सेसेपड़ासोचरहाहूँ
पत्तातोमैंसरसब्ज़थाक्यूँँटूटगिराहूँ
इकरोज़ज़र-ओ-सीमकेअम्बारभीथेहेच
बिकनेपेजोआयाहूँतोकौड़ीपेबिकाहूँ
शायदकिकभीमुझपेभीहीरेकागुमाँहो
देखोतोमैंपत्थरहूँमगरसोचरहाहूँ
हालातकाधाराकभीऐसेभीरुकाहै
नादाँहूँकिमैंरेतकेबंदबाँधरहाहूँ
इकरेतकीदीवारकीसूरतथेसबआदर्श
जिनकेलिएइकउम्रमैंदुनियासेलड़ाहूँ
अहबाबकीनज़रोंमेंहूँगरवाजिब-ए-ताज़ीम
क्यूँँअपनीनिगाहोंमेंबुरीतरहगिराहूँ
'फ़ख़्र'गरजनामिरीफ़ितरतसहीलेकिन
जोग़ैरकीमर्ज़ीसेहीबरसेवोघटाहूँ
  - Fakhr Zaman
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