जोराज़दारथेपहलेवोदुश्मन-ए-जाँहैं
मगरजोदुश्मन-ए-जाँथेवोराज़दारहुए
गुनाहख़ुदहीकियाख़ुदकोफिरसज़ादेली
हमअपनेहाथोंकईबारसंगसारहुए
कभीफ़सानासुनाकरभीआँखनमनहुई
तुम्हारेज़िक्रपेहीआजअश्क-बारहुए
हरएकचीज़कीइसदौरमेंसिफ़तबदली
पहाड़शहरबनेशहरकोहसारहुए
वोपौदेजिनकेसरापेबड़ेमुलाएमथे
हमारेदेखतेलम्होंमेंख़ार-दारहुए
गरेबाँजिनपेभरोसाथाहमफ़क़ीरोंको
जुनूँकीआँचसेपल-भरमेंतारतारहुए
बढ़ाएँउनकीतरफ़दस्त-ए-दोस्तीक्यूँँ-कर
जोगुल-सिफ़तथेकभी'फ़ख़्र'अबवोख़ारहुए