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Faizan Faizi
bahut takleef deti hai ye duniya
bahut takleef deti hai ye duniya | बहुत तकलीफ़ देती है ये दुनिया
- Faizan Faizi
बहुत
तकलीफ़
देती
है
ये
दुनिया
नए
अरमान
गर
दिल
में
बसा
लो
हमारे
बाल
भी
बिखरे
पड़े
हैं
सुनो
क्या
तुम
सँवारोगी
बता
दो
- Faizan Faizi
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कब
तुम्हें
इश्क़
पे
मजबूर
किया
है
हमने
हम
तो
बस
याद
दिलाते
हैं
चले
जाते
हैं
Abbas Tabish
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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ऐसे
हालात
से
मजबूर
बशर
देखे
हैं
अस्ल
क्या
सूद
में
बिकते
हुए
घर
देखे
हैं
हमने
देखा
है
वज़ादार
घरानों
का
जवाल
हमने
सड़कों
पे
कई
शाह
ज़फ़र
देखे
है
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Mehshar Afridi
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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इंसान
अपने
आप
में
मजबूर
है
बहुत
कोई
नहीं
है
बे-वफ़ा
अफ़्सोस
मत
करो
Bashir Badr
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मोहब्बत
के
इक़रार
से
शर्म
कब
तक
कभी
सामना
हो
तो
मजबूर
कर
दूँ
Akhtar Shirani
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दुखी
रहने
की
आदत
यूँंँ
बना
ली
है
कि
अब
कोई
ख़ुशी
का
ज़िक्र
भी
कर
दे
तो
फिर
तकलीफ़
होती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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यार
उसने
ही
किया
मजबूर
मुझको
मरने
पे
जो
ज़ियादा
रो
रहा
है
मेरे
मर
जाने
के
बाद
Shekhar kumar
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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नबी
की
पैरवी
करते
रहेंगे
हम
अपनी
जान
की
बाज़ी
लगा
कर
Faizan Faizi
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नए
लोगों
से
मिलना
पड़
रहा
है
पुराने
सब
बिछड़ते
जा
रहे
हैं
Faizan Faizi
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हम
तुम्हारे
इश्क़
के
इमकान
में
फूल
लेकर
हैं
खड़े
मैदान
में
बात
को
समझो
अनाएँ
छोड़
दो
रूठ
के
बैठो
न
यूँँ
मुल्तान
में
फूल
से
ख़ुश्बू
जुदा
होने
लगी
रख
दिए
थे
आप
जब
गुलदान
में
एक
दिन
देखा
किसी
के
साथ
में
हँस
रही
थी
बैठ
कर
दालान
में
जा
चुके
जो
लोग
फिर
आते
नहीं
है
यही
फ़ितरत
यहाँ
इंसान
में
पूछना
था
क्या
हुआ
था
उस
घड़ी
रो
रहे
थे
लोग
जब
ज़िंदान
में
इक
तरफ़
रख
दो
सभी
रंगीनियांँ
इक
तरफ़
ग़म
को
रखो
मीजा़न
में
दोस्त
मेरे
हैं
सभी
अच्छे
मगर
नाम
उनका
दर्ज
है
शैतान
में
जब
ग़रीबों
की
मदद
करना
कभी
याद
मत
रखना
उसे
एहसान
में
कुछ
नहीं
हासिल
हुआ
मुझ
को
यहाँ
कट
रही
है
उम्र
बस
नुक़सान
में
आसमाँ
पे
जब
बुलाना
हो
ख़ुदा
मौत
से
कहना
मिले
रमज़ान
में
देख
लो
बेहतर
किसी
भी
जान
में
कुछ
नहीं
है
ख़ूबियाँ
फैजा़न
में
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Faizan Faizi
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देख
कर
वो
ज़ालिम
जो
शरमाई
हमें
कुछ
रक़ीबों
के
दिल
पे
तलवारें
चली
Faizan Faizi
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मुझे
भी
बाद
मरने
के
ख़ुदा
जन्नत
में
डालेगा
दुआएँ
हैं
मिरी
हमराह
मेरे
दोस्त
भी
जाएँ
Faizan Faizi
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