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Faizan Faizi
naye logon se milnaa pad raha hai
naye logon se milnaa pad raha hai | नए लोगों से मिलना पड़ रहा है
- Faizan Faizi
नए
लोगों
से
मिलना
पड़
रहा
है
पुराने
सब
बिछड़ते
जा
रहे
हैं
- Faizan Faizi
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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नज़दीकी
अक्सर
दूरी
का
कारन
भी
बन
जाती
है
सोच-समझ
कर
घुलना-मिलना
अपने
रिश्ते-दारों
में
Aalok Shrivastav
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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मैं
इसलिए
भी
तिरे
वस्ल
से
झिझकता
हूँ
कहीं
फिर
इश्क़
मेरा
रायगाँ
न
हो
जाए
Wajid Husain Sahil
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अब
के
हम
तर्क-ए-रसूमात
करके
देखते
हैं
बीच
वालों
के
बिना
बात
करके
देखते
हैं
इस
सेे
पहले
कि
कोई
फ़ैसला
तलवार
करे
आख़िरी
बार
मुलाक़ात
करके
देखते
हैं
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Abrar Kashif
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चले
भी
आओ
भुला
कर
सभी
गिले-शिकवे
बरसना
चाहिए
होली
के
दिन
विसाल
का
रंग
Azhar Iqbal
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बात
से
बात
बनेगी
तू
कभी
बात
तो
कर
आ
ज़रा
पास
मिरे
यार
मुलाक़ात
तो
कर
पूछ
तू
भी
तो
कभी
हाल
हमारे
दिल
का
हाल
से
हाल
मिलाने
की
शुरूआत
तो
कर
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shaan manral
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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यार
ने
हम
से
बे-अदाई
की
वस्ल
की
रात
में
लड़ाई
की
Meer Taqi Meer
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वस्ल
का
दिन
और
इतना
मुख़्तसर
दिन
गिने
जाते
थे
इस
दिन
के
लिए
Ameer Minai
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इक
महीने
बाद
मिलना
था
हमें
वो
उधर
सज
धज
रही
सलवार
में
काम
दफ़्तर
का
ज़रा
होता
नहीं
मैं
इधर
उलझा
रहा
इतवार
में
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Faizan Faizi
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नबी
की
पैरवी
करते
रहेंगे
हम
अपनी
जान
की
बाज़ी
लगा
कर
Faizan Faizi
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सिखाया
था
जिसे
यूँँ
बोलने
को
वो
हम
से
बद-तमीज़ी
कर
रहा
है
Faizan Faizi
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सजा
कर
फूल
बालों
में
हमारे
पास
आते
हैं
अदब
से
बैठ
के
कुछ
देर
फिर
गज़लें
सुनाते
हैं
गिरा
कर
ज़ुल्फ़
अपनी
फिर
अदा-ए-नाज़
से
बोलें
सुनो
हम
प्यार
में
लोगों
को,
यूँँ
पागल
बनाते
हैं
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Faizan Faizi
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सुनो
मजनूंँ
बने
फिरते
रहोगे
यार
कब
तक
तुम
हमारा
मशवरा
है
इश्क़
कोई
दूसरा
कर
लो
Faizan Faizi
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