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Faizan Faizi
ham tumhaare ishq ke imkaan men
ham tumhaare ishq ke imkaan men | हम तुम्हारे इश्क़ के इमकान में
- Faizan Faizi
हम
तुम्हारे
इश्क़
के
इमकान
में
फूल
लेकर
हैं
खड़े
मैदान
में
बात
को
समझो
अनाएँ
छोड़
दो
रूठ
के
बैठो
न
यूँँ
मुल्तान
में
फूल
से
ख़ुश्बू
जुदा
होने
लगी
रख
दिए
थे
आप
जब
गुलदान
में
एक
दिन
देखा
किसी
के
साथ
में
हँस
रही
थी
बैठ
कर
दालान
में
जा
चुके
जो
लोग
फिर
आते
नहीं
है
यही
फ़ितरत
यहाँ
इंसान
में
पूछना
था
क्या
हुआ
था
उस
घड़ी
रो
रहे
थे
लोग
जब
ज़िंदान
में
इक
तरफ़
रख
दो
सभी
रंगीनियांँ
इक
तरफ़
ग़म
को
रखो
मीजा़न
में
दोस्त
मेरे
हैं
सभी
अच्छे
मगर
नाम
उनका
दर्ज
है
शैतान
में
जब
ग़रीबों
की
मदद
करना
कभी
याद
मत
रखना
उसे
एहसान
में
कुछ
नहीं
हासिल
हुआ
मुझ
को
यहाँ
कट
रही
है
उम्र
बस
नुक़सान
में
आसमाँ
पे
जब
बुलाना
हो
ख़ुदा
मौत
से
कहना
मिले
रमज़ान
में
देख
लो
बेहतर
किसी
भी
जान
में
कुछ
नहीं
है
ख़ूबियाँ
फैजा़न
में
- Faizan Faizi
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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वैसे
तो
ज़ेवरों
की
ज़रूरत
नहीं
तुझे
फिर
भी
अगर
ये
फूल
तेरे
काम
आ
सके
Charagh Sharma
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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न
उन
लबों
पे
तबस्सुम
न
फूल
शाख़ों
पर
गुज़र
गए
हैं
जो
मौसम
गुज़रने
वाले
थे
Kaif Uddin Khan
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लहजा
कि
जैसे
सुब्ह
की
ख़ुश्बू
अज़ान
दे
जी
चाहता
है
मैं
तिरी
आवाज़
चूम
लूँ
Bashir Badr
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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हर
कोई
फूल-सा
है
लेकिन
वो
फूल
में
फूल
है
गुलाब
का
फूल
Ramnath Shodharthi
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ये
भँवरे
रौशनी
खो
देंगे
अपनी
आँखों
की
अगर
चमन
में
जो
कलियाँ
नक़ाब
ओढेंगी
Shajar Abbas
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छुआ
है
तुमने
भी
इक
रोज़
हमको
ये
ख़ुशबू
देर
तक
महका
करेगी
तुम्हारे
हाथ
सालों
तक
ये
दुनिया
हमारे
नाम
पे
चूमा
करेगी
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Ritesh Rajwada
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मैंने
चाहा
भी
कि
फिर
इस
संग-दिल
पे
फूल
उगे
पर
तुम्हारी
रुख़्सती
के
बाद
ये
होता
नहीं
Siddharth Saaz
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सुना
है
चाँद
सी
काफ़ी
हसीं
है
नहीं
देखा
मगर
ख़ूबी
बहुत
है
नहीं
करना
किसी
से
दोस्ती
अब
हमारे
साथ
इक
सूफी
बहुत
है
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Faizan Faizi
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आप
ही
बस
ख़ास
रहबर
हैं
मिरे
कीजिए
सरकार
अब
नज़रे
करम
है
बड़ी
हसरत
कि
आक़ा
एक
दिन
आप
का
दीदार
हो
देखूंँ
हरम
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Faizan Faizi
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सुनो
मजनूंँ
बने
फिरते
रहोगे
यार
कब
तक
तुम
हमारा
मशवरा
है
इश्क़
कोई
दूसरा
कर
लो
Faizan Faizi
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लगता
है
मुझे
वज्द
में
आना
पड़ेगा
बारिशे
होंगी
तो
भीग
जाना
पड़ेगा
Faizan Faizi
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है
ह़कीक़त
बस
यही
तुम
जान
लो
मैं
फ़क़त
तुम
पे
हूँ
मरता
मान
लो
जिस
तरह
राँझा
फ़िदा
था
हीर
पर
हूँ
वही
'आशिक़,
मुझे
पहचान
लो
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Faizan Faizi
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