dil jis ka dard-e-ishq ka haamil nahin raha | दिल जिस का दर्द-ए-इश्क़ का हामिल नहीं रहा

  - Faiz ul Hasan Khayal
दिलजिसकादर्द-ए-इश्क़काहामिलनहींरहा
वोशख़्सतेरेप्यारकेक़ाबिलनहींरहा
जबभीहिनाईहाथोंसेगेसूसँवरगए
आईना-ए-बहारमुक़ाबिलनहींरहा
हरआस्ताँसेलौटकेआनापड़ाउसे
जोतेरेदरपेआनेकेक़ाबिलनहींरहा
महरूमियाँहीजिसकामुक़द्दरहैंदोस्तो
वोमहफ़िल-ए-नशातकेक़ाबिलनहींरहा
जबतुमथेतोकुछभीनहींथाबहारमें
तुमगएतोकोईमुक़ाबिलनहींरहा
दीवानेतेरेडूबगएगहरीनींदमें
ज़िंदाँमेंशोर-ए-तौक़-ओ-सलासिलनहींरहा
जबआपमुस्कुराएग़म-ए-दिलकीबातपर
दिलदर्दकोछुपानेकेक़ाबिलनहींरहा
तन्हाइयोंकीबज़्महीअच्छीरही'ख़याल'
महफ़िलमेंपुर-सुकूनकभीदिलनहींरहा
  - Faiz ul Hasan Khayal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy