na to ham bahar se waqif na sukhun jaante hain | न तो हम बहरस वाक़िफ़ न सुख़न जानते हैं

  - Faiz Khalilabadi
तोहमबहरसवाक़िफ़सुख़नजानतेहैं
कैसेदेंलफ़्ज़ोंकोतरतीबयेफ़नजानतेहैं
वोकिसीतौरभीतुझकोलगाएँगेगले
ख़ुशीजोभीतिराचाल-चलनजानतेहैं
दिलकेमंदिरमेंहैंदोएकपुजारीऐसे
जोपूजाइबादतभजनजानतेहैं
इसलिएथामकेरक्खाहैजुनूँकादामन
ख़िरदहमतिरादीवालिया-पनजानतेहैं
जोमोहब्बतकेहैंअल्फ़ाज़मिरेहोंटोंपर
वोतअ'स्सुबकातिरेचीर-हरनजानतेहैं
पाँवफैलातेहैंइतनाकिहैजितनीचादर
अपनीऔक़ातहैक्याख़ूबअपनजानतेहैं
  - Faiz Khalilabadi
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