aasmaañ tapte hue lohe ki maanind safed | आसमाँ तपते हुए लोहे की मानिंद सफ़ेद

  - Fahmida Riaz
आसमाँतपतेहुएलोहेकीमानिंदसफ़ेद
रेगसूखीहुईप्यासेकीज़बाँकीमानिंद
प्यासहुल्क़ूममेंहैजिस्ममेंहैजानमेंहै
सर-ब-ज़ानूहूँझुलसतेहुएरेगिस्ताँमें
तेरीसरकारमेंलेआईहूँयेवहशज़बीह!
मुझपेलाज़िमथीजोक़ुर्बानीवोमैंनेकरदी
उसकीउबलीहुईआँखोंमेंअभीतकहैचमक
औरसियह-बालहैंभीगेहुएख़ूँसेअबतक
तेराफ़रमानयेथाउसपेकोईदाग़हो
सोयेबे-ऐबअछूताभीथाअन-देखाभी
बे-कराँरेगमेंसबगर्मलहूजज़्बहुआ
देखचादरपेमिरीसब्तहैउसकाधब्बा
ख़ुदा-वंद-ए-कबीर
जब्बार!
मुतकब्बिरजलील!
हाँतिरेनामपढ़ेऔरकियाज़ब्हउसे
अबकोईपारा-ए-अब्रआएकहींसायाहो
ख़ुदा-वंद-ए-अज़ीम
बाद-ए-तस्कीं!केनफ़सआगबनाजाताहै!
क़तरा-ए-आबकिजाँलबपेचलीआईहै
  - Fahmida Riaz
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