chaar-soo hai badi vehshat ka samaan | चार-सू है बड़ी वहशत का समाँ

  - Fahmida Riaz
चार-सूहैबड़ीवहशतकासमाँ
किसीआसेबकासायाहैयहाँ
कोईआवाज़सीहैमर्सियाँ-ख़्वाँ
शहरकाशहरबनागोरिस्ताँ
एकमख़्लूक़जोबस्तीहैयहाँ
जिसपेइंसाँकागुज़रताहैगुमाँ
ख़ुदतोसाकितहैमिसाल-ए-तस्वीर
जुम्बिश-ए-ग़ैरसेहैरक़्स-कुनाँ
कोईचेहरानहींजुज़ज़ेर-ए-नक़ाब
कोईजिस्महैजुज़बे-दिल-ओ-जाँ
उलमाहैंदुश्मन-ए-फ़हम-ओ-तहक़ीक़
कोदनीशेवा-ए-दानिश-मंदाँ
शाइ'र-ए-क़ौमपेबनआईहै
किज़्बकैसेहोतसव्वुफ़मेंनिहाँ
लबहैंमसरूफ़-ए-क़सीदा-गोई
औरआँखोंमेंहैज़िल्लतउर्यां
सब्ज़ख़तआक़िबत-ओ-दींकेअसीर
पारसाख़ुश-तन-ओ-नौ-ख़ेज़जवाँ
येज़न-ए-नग़्मा-गर-ओ-इश्क़-शिआ'र
यास-ओ-हसरतसेहुईहैहैराँ
किससेअबआरज़ू-ए-वस्लकरें
इसख़राबेमेंकोईमर्दकहाँ
  - Fahmida Riaz
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