गुज़रीथीएकबारजोदिलकीगलीसेमैं
दो-चारआजभीहूँउसीबे-कलीसेमैं
बे-ज़ारइसक़दरहूँग़म-ए-आशिक़ीसेमैं
मुझसेज़राख़फ़ाहैख़ुशीऔरख़ुशीसेमैं
निकलीहूँजबसेढूँडनेबे-लौसचाहतें
धोकाहीखारहीहूँबड़ीसादगीसेमैं
मा'दूमउसकीआँखसेपहचानहोगई
जैसेकिमिलरहीथीकिसीअजनबीसेमैं
जिंस-ए-वफ़ाजहानमेंनायाबक्यूँहुई
रोरोकेपूछतीरहीहरआदमीसेमैं
अपनीख़ुशीसेवैसेबसरतोनकरसकी
नाराज़भीनहींहूँमगरज़िंदगीसेमैं
मैंनेभीसाफ़लफ़्ज़ोंमेंग़मसेयेकहदिया
पीछाछुड़ाकेआईहूँअफ़्सुर्दगीसेमैं
मय-ख़ानाचलकेरिंदकाख़ुदपूछताहैहाल
मानूसइसतरहसेहूँअबमय-कशीसेमैं
जाम-ओ-सुबूनहींतिरीआँखोंसेअबपिला
ऐसाक़ीमरनजाऊँकहींतिश्नगीसेमैं