guzri thii ek baar jo dil ki gali se main | गुज़री थी एक बार जो दिल की गली से मैं

  - Fahmida Mosarrat Ahmad
गुज़रीथीएकबारजोदिलकीगलीसेमैं
दो-चारआजभीहूँउसीबे-कलीसेमैं
बे-ज़ारइसक़दरहूँग़म-ए-आशिक़ीसेमैं
मुझसेज़राख़फ़ाहैख़ुशीऔरख़ुशीसेमैं
निकलीहूँजबसेढूँडनेबे-लौसचाहतें
धोकाहीखारहीहूँबड़ीसादगीसेमैं
मा'दूमउसकीआँखसेपहचानहोगई
जैसेकिमिलरहीथीकिसीअजनबीसेमैं
जिंस-ए-वफ़ाजहानमेंनायाबक्यूँहुई
रोरोकेपूछतीरहीहरआदमीसेमैं
अपनीख़ुशीसेवैसेबसरतोकरसकी
नाराज़भीनहींहूँमगरज़िंदगीसेमैं
मैंनेभीसाफ़लफ़्ज़ोंमेंग़मसेयेकहदिया
पीछाछुड़ाकेआईहूँअफ़्सुर्दगीसेमैं
मय-ख़ानाचलकेरिंदकाख़ुदपूछताहैहाल
मानूसइसतरहसेहूँअबमय-कशीसेमैं
जाम-ओ-सुबूनहींतिरीआँखोंसेअबपिला
साक़ीमरजाऊँकहींतिश्नगीसेमैं
  - Fahmida Mosarrat Ahmad
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