zaat jab bhi udaan tak pahunchee | ज़ात जब भी उड़ान तक पहुँची

  - Fahmida Mosarrat Ahmad
ज़ातजबभीउड़ानतकपहुँची
वुसअ'त-ए-ला-मकानतकपहुँची
जबहक़ीक़तगुमानतकपहुँची
इकनएइम्तिहानतकपहुँची
बातफैलाईथीजोदुश्मनने
देखोवोमेहरबानतकपहुँची
कश्तियाँसबजलाकेआईथी
जबवोतेरेमकानतकपहुँची
इकतिरानामक्यालियाहमने
बाततीर-ओ-कमानतकपहुँची
राज़-दाँसेकहीथीचुपकेसे
बातसारेजहानतकपहुँची
अबतिरेइंतिज़ारमेंदोस्त
मुस्कुराहटथकानतकपहुँची
ओढ़करज़ब्तकीरिदापैहम
हौसलेकीचटानतकपहुँची
आख़िर-ए-शबदु'आ'मसर्रत'की
जाकेफिरआसमानतकपहुँची
  - Fahmida Mosarrat Ahmad
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