gham ki gar chaashni nahin hoti | ग़म की गर चाशनी नहीं होती

  - Faheem Amrohvi
ग़मकीगरचाशनीनहींहोती
ज़िंदगीज़िंदगीनहींहोती
रूठजानातोख़ैरआसाँहै
परमनानाहँसीनहींहोती
उनकेपीछेतोहैउन्हींकाज़िक्र
सामनेबातभीनहींहोती
दिललगाकरसमझमेंआयाहै
येकोईदिल-लगीनहींहोती
बे-ख़ुदीसेजोहम-कनारनहीं
वोख़ुदीआगहीनहींहोती
आहजोअर्शतकपहुँचसके
दिलसेनिकलीहुईनहींहोती
हुस्नकोइश्क़हीनेदीहैकशिश
चाँदमेंरौशनीनहींहोती
बर्क़भीकौंदतीतोहैलेकिन
उनकीअंगड़ाईसीनहींहोती
फूलरोतेहैंसारीरात'फहीम'
ओसकीयेतरीनहींहोती
  - Faheem Amrohvi
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