nigaah-e-baagbaan kuchh meherbaan ma'aloom hoti hai | निगाह-ए-बाग़बाँ कुछ मेहरबाँ मा'लूम होती है

  - Ezaz Afzal
निगाह-ए-बाग़बाँकुछमेहरबाँमा'लूमहोतीहै
ज़मींपरआजशाख़-ए-आशियाँमा'लूमहोतीहै
बुलायाजारहाहैजानिब-ए-दार-ओ-रसनहमको
मुक़द्दरमेंहयात-ए-जाविदाँमा'लूमहोतीहै
निगाहोंमेंहैंकिसकेआरिज़-ए-गुल-रंगकेजल्वे
किदुनियागुलिस्ताँ-दर-गुलिस्ताँमा'लूमहोतीहै
मिरीकश्तीकोशिकवाबहर-ए-बे-पायाँकीतंगीका
तुझेएकआबजूभीबे-कराँमा'लूमहोतीहै
पहुँचकरआसमाँपरभीतोदेखोज़मींवालो
वहाँसेयेज़मींभीआसमाँमा'लूमहोतीहै
  - Ezaz Afzal
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