aaj dil hai ki sar-e-shaam bujha lagta hai | आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है

  - Ezaz Afzal
आजदिलहैकिसर-ए-शामबुझालगताहै
येअँधेरेकामुसाफ़िरभीथकालगताहै
अपनेबहकेहुएदामनकीख़बरलीगई
जिसकोदेखोचराग़ोंसेख़फ़ालगताहै
बाग़काफूलनहींलाला-ए-सहराहूँमैं
लूकाझोंकाभीमुझेबाद-ए-सबालगताहै
तंगी-ए-ज़र्फ़-ए-नज़रकसरत-ए-नज़्ज़ारा-ए-दहर
प्यासकच्चीहोतोहरजामभरालगताहै
किसतकल्लुफ़सेगिरहखोलरहाहूँदिलकी
उक़्दा-ए-दर्दतिराबंद-ए-क़बालगताहै
ख़ार-ज़ारोंकोसिखादेगुलिस्ताँकाचलन
येमुसाफ़िरतोकोईआबला-पालगताहै
देखतूरौज़न-ए-ज़िंदाँसेज़रासू-ए-चमन
आजक्यूँँदिलकाहरइकज़ख़्महरालगताहै
कौन'अफ़ज़ल'केसिवाऐसीग़ज़लछेड़ेगा
दोस्तोयेवहीआशुफ़्ता-नवालगताहै
  - Ezaz Afzal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy