ye shahar ye KHvaabon ka samundar na bachega | ये शहर ये ख़्वाबों का समुंदर न बचेगा

  - Ezaz Afzal
येशहरयेख़्वाबोंकासमुंदरबचेगा
जबआगलगेगीतोकोईघरबचेगा
यानक़्शउभारोकोईयाअक्सकोपूजो
शीशेकोबचाओगेतोपत्थरबचेगा
एहसास-ए-रक़ाबतसेजबीनोंकोबचाओ
टकराएँगेसज्देतोकोईदरबचेगा
नींदछुपेरहनेदेदो-चारनज़ारे
जबआँखखुलेगीकोईमंज़रबचेगा
मक़्तलकीसियासतहमारीतुम्हारी
तफ़रीक़करोगेतोकोईसरबचेगा
  - Ezaz Afzal
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