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Sushrut Tiwari
ishq aur havas do alag baatein hain
ishq aur havas do alag baatein hain | इश्क़ और हवस, दो अलग बातें हैं
- Sushrut Tiwari
इश्क़
और
हवस,
दो
अलग
बातें
हैं
पनाह
और
क़फ़स,
दो
अलग
बातें
हैं
है
सारा
ग़म
यही
कि
दुनिया
की
बातों
में
मैं
और
तू
हमनफ़स,
दो
अलग
बातें
हैं
- Sushrut Tiwari
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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मेरी
तन्हाई
देखेंगे
तो
हैरत
ही
करेंगे
लोग
मोहब्बत
छोड़
देंगे
या
मोहब्बत
ही
करेंगे
लोग
Ismail Raaz
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याद
रखना
ही
मोहब्बत
में
नहीं
है
सब
कुछ
भूल
जाना
भी
बड़ी
बात
हुआ
करती
है
Jamal Ehsani
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मैं
दौड़
दौड़
के
ख़ुद
को
पकड़
के
लाता
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
ने
बच्चा
बना
दिया
है
मुझे
Liaqat Jafri
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बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
जान-ए-
मन
बाक़ी
सब
जज़्बात
का
इज़हार
कम
कर
दीजिए
Farhat Ehsaas
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सुने
हैं
मोहब्बत
के
चर्चे
बहुत
सुना
है
कि
हैं
इस
में
ख़र्चे
बहुत
नतीजे
मोहब्बत
के
आए
नहीं
भरे
थे
मगर
हम
ने
पर्चे
बहुत
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S M Afzal Imam
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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इश्क़
पर
ज़ोर
नहीं
है
ये
वो
आतिश
'ग़ालिब'
कि
लगाए
न
लगे
और
बुझाए
न
बने
Mirza Ghalib
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अक़्ल
पे
बेहोशी
का
पर्दा
डाल
रखा
है
नाहक़
ही
तेरा
दर्द
संभाल
रखा
है
है
खोटा
जो
बाज़ार-ए-इश्क़
में
हमने
सिक्का
तेरे
नाम
का
उछाल
रखा
है
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Sushrut Tiwari
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बमुश्किल
उसकी
गली
से
राह
मोड़
लेता
हूँ
अँधेरा
साथ
लेता
हूँ,
रोशनी
छोड़
देता
हूँ
किसी
दिन
चली
आना
पैदल
ही
मेरे
घर
जाओगी
तो
कहूंगा,
चलो,
मैं
छोड़
देता
हूँ
नई
इब्तिदास
इस
क़दर
ख़ौफ़
है
मुझको
मक़्ता
लिख
लेता
हूँ,
मतला
छोड़
देता
हूँ
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Sushrut Tiwari
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कोई
दर्द
नहीं,
कोई
दु'आ
भी
नहीं
पत्थरों
को
कभी
कुछ
हुआ
भी
नहीं
सज़ा
हो
गई
उसको
ता'उम्र
क़ैद
की
वो
फ़रियादी
जिसकी
ख़ता
भी
नहीं
हमको
देखना
आकर,
तुम्हें
मालूम
होगा
तुम
सेे
क़त्ल
हो
गया
है,
तुम्हें
पता
भी
नहीं
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Sushrut Tiwari
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एक
ख़त्म
नहीं
होता
कि
रग-ए-जां
दबाने
को
कोई
नया
मसअला
तैयार
रहता
है
जाने
तू
कैसी
अदालत
का
मुंसिफ़
है
तेरी
निगाह
में
हर
शख़्स
गुनहगार
रहता
है
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Sushrut Tiwari
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वाकिफ़
ज़रूर
मेरी
अज़ीयत
से
होगा
एक
दिन
उसका
सामना
हक़ीक़त
से
होगा
हाल
नहीं
पूछते,
ख़ुद
को
देख
लेते
हैं
हम
जो
हैं
बर्बाद,
वो
ख़ैरियत
से
होगा
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Sushrut Tiwari
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