nizaam-e-fikr ne badla hi tha sawaal ka rang | निज़ाम-ए-फ़िक्र ने बदला ही था सवाल का रंग

  - Ejaz Siddiqi
निज़ाम-ए-फ़िक्रनेबदलाहीथासवालकारंग
झलकउठाकईचेहरोंसेइंफ़िआलकारंग
गुल-कदोंकोमुयस्सरचाँद-तारोंको
तिरेविसालकीख़ुश्बूतिरेजमालकारंग
ज़रासीदेरकोचेहरेदमकतोजातेहैं
ख़ुशीकारंगहोयाहोग़म-ओ-मलालकारंग
ज़मानाअपनीकहानीसुनारहाथाहमें
उभरगयामगरआग़ाज़मेंमआलकारंग
असीर-ए-वक़्तहैतोमैंहूँवक़्तसेआज़ाद
तिरेउरूजसेअच्छामिरेज़वालकारंग
बसान-ए-तख़्ता-ए-गुलमेरीफ़िक्रहैआज़ाद
मिसाल-ए-क़ौस-ए-कुज़हहैमिरेख़यालकारंग
  - Ejaz Siddiqi
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