mil sakegi ab bhi daad-e-aablaa-paai to kya | मिल सकेगी अब भी दाद-ए-आबला-पाई तो क्या

  - Ejaz Siddiqi
मिलसकेगीअबभीदाद-ए-आबला-पाईतोक्या
फ़ासलेकमहोगएमंज़िलक़रीबआईतोक्या
हैवहीजब्र-ए-असीरीऔरवहीग़मकाक़फ़स
दिलपेबनआईतोक्यायेरूहघबराईतोक्या
अपनीबे-ताबी-ए-दिलकाख़ुदतमाशाबनगए
आपकीमहफ़िलकेबनतेहमतमाशाईतोक्या
बाततोजबहैकिसारागुलिस्ताँहँसनेलगे
फ़स्ल-ए-गुलमेंचंदफूलोंकीहँसीआईतोक्या
लाओइनबे-कैफ़ियोंहीसेनिकालेंराह-ए-कैफ़
वक़्तअबलेगाकोईपुर-कैफ़अंगड़ाईतोक्या
कम-निगाहीनेउसेकुछऔरगहराकरदिया
वोछुपातेहीरहेंरंग-ए-शनासाईतोक्या
फिरज़रासीदेरमेंचौंकाएगाख़्वाब-ए-सहर
आख़िर-ए-शबजागनेकेबा'दनींदआईतोक्या
बेड़ियाँवहम-ए-तअ'ल्लुक़कीनईपहनागए
दोस्तकरकाटतेज़ंजीरतन्हाईतोक्या
शोरिश-ए-अफ़्कारसे'एजाज़'दामानदासही
छिनसकेगीफिरभीफ़िक्र-ओ-फ़नकीरा'नाईतोक्या
  - Ejaz Siddiqi
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