mit gaya gham tire takallum se | मिट गया ग़म तिरे तकल्लुम से

  - Ejaz Rahmani
मिटगयाग़मतिरेतकल्लुमसे
लबहुएआश्नातबस्सुमसे
किसकेनक़्श-ए-क़दमहैंराहोंमें
जगमगातेहैंमाह-ओ-अंजुमसे
हैज़मानाबड़ाज़माना-शनास
कभीमुझसेगिलाकभीतुमसे
नाख़ुदाभीमिलातोऐसामिला
आश्नाजोनहींतलातुमसे
उसनेकरमिज़ाजपूछलिया
हमतोबैठेहुएथेगुम-सुमसे
नाख़ुदानेडुबोदियाउनको
वोकिजोबचगएतलातुमसे
ज़िंदगीहादसोंकीज़दमेंहै
कोईकैसेबचेतसादुमसे
साया-ए-गुलमेंबैठनेवालो
गुफ़्तुगूहोगीदारपरतुमसे
मैंग़ज़लकाअसीरहूँ'एजाज़'
शे'रपढ़ताहूँमैंतरन्नुमसे
  - Ejaz Rahmani
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