zalim se mustafa ka amal chahte hain log | ज़ालिम से मुस्तफ़ा का अमल चाहते हैं लोग

  - Ejaz Rahmani
ज़ालिमसेमुस्तफ़ाकाअमलचाहतेहैंलोग
सूखेहुएदरख़्तसेफलचाहतेहैंलोग
काफ़ीहैजिनकेवास्तेछोटासाइकमकाँ
पूछेकोईतोशीश-महलचाहतेहैंलोग
साएकीमाँगतेहैंरिदाआफ़्ताबसे
पत्थरसेआइनेकाबदलचाहतेहैंलोग
कबतककिसीकीज़ुल्फ़-ए-परेशाँकातज़्किरा
कुछअपनीउलझनोंकाभीहलचाहतेहैंलोग
बार-ए-ग़म-ए-हयातसेशानेहुएहैंशल
उकताकेज़िंदगीसेअजलचाहतेहैंलोग
रखतेनहींनिगाहतक़ाज़ोंपेवक़्तके
तालाबकेबग़ैरकँवलचाहतेहैंलोग
जिसकोभीदेखिएहैवहीदुश्मन-ए-सुकूँ
क्यादौरहैकिजंग-ओ-जदलचाहतेहैंलोग
दरकारहैनजातग़म-ए-रोज़गारसे
मिर्रीख़चाहतेहैंज़ुहलचाहतेहैंलोग
'एजाज़'अपनेअहदकामैंतर्जुमानहूँ
मैंजानताहूँजैसीग़ज़लचाहतेहैंलोग
  - Ejaz Rahmani
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