gham-e-hayaat ka manzar badlne vaala hai | ग़म-ए-हयात का मंज़र बदलने वाला है

  - Ejaz Ansari
ग़म-ए-हयातकामंज़रबदलनेवालाहै
ख़ुशीमनाओकिसूरजनिकलनेवालाहै
वोशख़्सजिसनेहमेशाख़ुलूसबाँटाथा
ज़रासीबातपेतेवरबदलनेवालाहै
ग़ुरूरहोनेलगाउसकोअपनीशोहरतपर
येअज़दहाइसेज़िंदानिगलनेवालाहै
सँभालोअपनेसफ़ीनेख़ुदअपनेहाथोंमें
सुनाहैआजसमुंदरमचलनेवालाहै
वक़ार-ए-इल्म-ओ-हुनरकमहोकहीं'एजाज़'
यहीचराग़हवाओंमेंजलनेवालाहै
  - Ejaz Ansari
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