ajab hi kya hai agar dhund men ghubaar men hai | अजब ही क्या है अगर धुँद में ग़ुबार में है

  - Ejaz Ansari
अजबहीक्याहैअगरधुँदमेंग़ुबारमेंहै
वोशख़्सअपनेबनाएहुएहिसारमेंहै
कहाँहैवक़्तअभीहमकोदिललगानेका
हमारीसोचअभीफ़िक्र-ए-रोज़गारमेंहै
ग़मोंकेसाएमेंख़ुशियोंकेफूलमहकेहैं
ख़िज़ाँकाअक्सभीकुछमौसम-ए-बहारमेंहै
जोइक़्तिदारकेलाएक़थाकिसीसूरत
सितमयेहैकिवहीशख़्सइक़्तिदारमेंहै
ख़ुदाकोकरनाहैवापसरहेख़याल'एजाज़'
हमारेपासतोयेज़िंदगीउधारमेंहै
  - Ejaz Ansari
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