kho jaaun musht-e-khaak men aisa nahin hooñ main | खो जाऊँ मुश्त-ए-ख़ाक में ऐसा नहीं हूँ मैं

  - Ejaz Ansari
खोजाऊँमुश्त-ए-ख़ाकमेंऐसानहींहूँमैं
दरियाहूँअपनीज़ातमेंक़तरानहींहूँमैं
गुज़रूँगाजिसजगहसेनिशाँछोड़जाऊँगा
आँधीहूँअपनेवक़्तकीझोंकानहींहूँमैं
मंज़िलसेयेकहोकिकरेमेराइंतिज़ार
ठहराहुआज़रूरहूँभटकानहींहूँमैं
पूछीहैख़तमेंआपनेजोख़ैरियतमिरी
कैसेलिखूँजनाबकिअच्छानहींहूँमैं
ख़ुशबूतिरेबदनकीमिरेसाथसाथहै
कहदेकोईहवाओंसेतन्हानहींहूँमैं
हुस्न-ओ-शबाबसाग़र-ओ-मीनाथेसामने
लेकिनकिसीभीशबकहींठहरानहींहूँमैं
देकरखिलौनेमुझकोजोबहलारहेहैंलोग
'एजाज़'उनसेकहदोकिबच्चानहींहूँमैं
  - Ejaz Ansari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy