roz jab raat ko baarah ka gajr hota hai | रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है

  - Dushyant Kumar
रोज़जबरातकोबारहकागजरहोताहै
यातनाओंकेअँधेरेमेंसफ़रहोताहै
कोईरहनेकीजगहहैमिरेसपनोंकेलिए
वोघरौंदाहीसहीमिट्टीकाभीघरहोताहै
सिरसेसीनेमेंकभीपेटसेपाँवमेंकभी
इकजगहहोतोकहेंदर्दइधरहोताहै
ऐसालगताहैकिउड़करभीकहाँपहुँचेंगे
हाथमेंजबकोईटूटाहुआपरहोताहै
सैरकेवास्तेसड़कोंपेनिकलआतेथे
अबतोआकाशसेपथरावकाडरहोताहै
  - Dushyant Kumar
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