ummeed par hamaari ye duniya kharee nahin | उम्मीद पर हमारी ये दुनिया खरी नहीं

  - Dr. Azam
उम्मीदपरहमारीयेदुनियाखरीनहीं
फिरभीतोउसकोपानेकीख़्वाहिशमिरीनहीं
बे-वज्हगुल-रुख़ोंसेमिरीबे-रुख़ीकहाँ
मेरेजुनून-ए-शौक़केक़ाबिलपरीनहीं
तस्कींमिलेभीदीदा-ए-हैराँकोकिसतरह
शीशागरीनहींकहींजल्वागरीनहीं
बद-रंगसीबहारहैफ़स्ल-ए-बहारमें
बश्शाशदिलनहींहैतबीअ'तहरीनहीं
लगताहैआजशहरकेहालातठीकहैं
मस्जिदवगरनाकलकीतरहक्यूँँभरीनहीं
हालाँकिमेरेजुर्मपेपर्देपड़ेरहे
दिलकीमलामतोंसेमगरमैंबरीनहीं
धरतीपेदिखरहेहैंगुनाहोंकेअबअसर
'आज़म'कहींतोख़ुश्कीकहींपरतरीनहीं
  - Dr. Azam
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