afsos banii hi nahin pahchaan abhii tak | अफ़सोस बनी ही नहीं पहचान अभी तक

  - Dr. Azam
अफ़सोसबनीहीनहींपहचानअभीतक
हरअहल-ए-नज़रमुझसेहैअंजानअभीतक
सदियोंकेतग़य्युरसेबनीसूरत-ए-इंसाँ
इंसाननहींहैमगरइंसानअभीतक
इल्हामसेइबहामसेईहामसेछूटे
कितनेहैंख़यालातपरेशानअभीतक
कितनेहीखुलेफ़हम-ओ-फ़रासतकेदरीचे
हैंक़ैद-ए-जहालतमेंहमइंसानअभीतक
हैंदैर-ओ-हरमकुछकिनहींदैर-ओ-हरमकुछ
ठहरानहींमेराकहींईमानअभीतक
हमअहल-ए-तज़बज़ुबकाफ़सानाभीअजबहै
काफ़िरहीबनेहैंमुसलमानअभीतक
तस्कीनकीसूरतकोईमिलतीनहीं'आज़म'
मेरीनिगह-ए-शौक़हैहैरानअभीतक
  - Dr. Azam
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