मैंबज़्मकीमुतहय्यरसमाअ'करदूँक्या
ग़ज़लकीसिंफ़मेंकुछइख़तिराअ'करदूँक्या
बग़ैरउसकेभीज़िंदाहूँऔरमज़ेमेंहूँ
बिछड़नेवालेकोयेइत्तिलाअ''करदूँक्या
मुझेपसंदनहींअज़दहामलोगोंका
येमुन्कशिफ़मैंसर-ए-इज्तिमाअ'करदूँक्या
मुझेतोतुमनेहीबर्बादकरदियालेकिन
तुम्हारेहक़मेंतुम्हारीदिफ़ाकरदूँक्या
तुम्हेंपसंदनहींहैमिरायेकार-ए-सुख़न
तमामग़ज़लेंकहोनज़्र-ए-जाँकरदूँक्या
इसीसबबतोपरेशान-हालरहताहूँ
अनाकेज़ो'मको'आज़म'विदाअ'करदूँक्या