buland fikr ki har she'r se ayaan ho ramq | बुलंद फ़िक्र की हर शे'र से अयाँ हो रमक़

  - Dr. Azam
बुलंदफ़िक्रकीहरशे'रसेअयाँहोरमक़
मिरेक़लमसेअदाहोकभीग़ज़लकाहक़
उदासउदासहैंइंसाँहरएकचेहराफ़क़
येशहरशहरहैयादश्तहैयेलक़-ओ-दक़
मैंदिलकीबातकहूँयूँँकिदिलतलकपहुँचे
होंकिनाएहीमुबहमइस्तिआ'रेअदक़
चलोसमेटकेऑफ़िसकोअपनेघरकीतरफ़
उफ़ुक़केपारवोदेखोउतररहीहैशफ़क़
ज़रासाइल्म-ओ-हुनरपागएतोकुछकम-ज़र्फ़
समझरहेहैंसभीकोहीअहक़र-ओ-अहमक़
फिरएहतिजाजकेरस्तेपेक्यूँँचलेंगेहम
हमेंजोमिलतारहेआपसेहमाराहक़
तअ'ल्लुक़ातमेंक़ाएमरखेंभरोसेको
किशकहमेशाहीकरतारहाहैरिश्तेशक़
किसीकिताबमेंमिलतानहींहैज़िक्र'आज़म'
हमेंसिखाएहैंइसज़िंदगीनेऐसेसबक़
  - Dr. Azam
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