har shaKHs men kuchh log kamii dhundh rahe hain | हर शख़्स में कुछ लोग कमी ढूँड रहे हैं

  - Dr. Azam
हरशख़्समेंकुछलोगकमीढूँडरहेहैं
नादानहैंमुसबतमेंनफ़ीढूँडरहेहैं
गुलढूँडरहेहैंकलीढूँडरहेहैं
गुलशनमेंबसइकशाख़हरीढूँडरहेहैं
इसयुगमेंकहाँहमभीवलीढूँडरहेहैं
इंसाँमेंसिफ़ात-ए-बशरीढूँडरहेहैं
बादलकीसियाहीमेंकिरनजैसीचमकती
हरग़ममेंछिपीहमभीख़ुशीढूँडरहेहैं
इकशे'रजोमौज़ूँनहींकरपाएहैंअबतक
'ग़ालिब'कीग़ज़लमेंभीकमीढूँडरहेहैं
मुद्दतसेतक़ाज़ाहैकिलौटादोमिरादिल
मुद्दतसेबहानाहैअभीढूँडरहेहैं
तहज़ीब-ओ-तमद्दुनकोख़ुलूसऔरवफ़ाको
'आज़म'हीनहींआजसभीढूँडरहेहैं
  - Dr. Azam
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