har mohabbat men kyun ye baab aa.e | हर मोहब्बत में क्यूँँ ये बाब आए इश्क़-ए-बर्बाद का निसाब आए

  - Divya Jain
हरमोहब्बतमेंक्यूँँयेबाबआएइश्क़-ए-बर्बादकानिसाबआए
सोचयेपहनेख़ारहैहमने
शाख़-ए-हस्तीपेफिरगुलाबआए
क्याकरेगावोमय-कदेजाके
जिसकीक़िस्मतमेंमयआबआए
पलकोंकेडालेनींदनेपर्दे
किसदरीचेसेहोकेख़्वाबआए
जुस्तुजूकोतूसुब्हरोज़उगा
इसमेंशायदकभीतोताबआए
छोड़हमनेदियावफ़ाकरना
देखेंइससम्तक्याहिसाबआए
ज़िंदगीपूरीदश्तमेंगुज़री
अबतोबनमौतहीसराबआए
  - Divya Jain
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