phir vahii raat jo tanhaaii ke aaghosh rahi | फिर वही रात जो तन्हाई के आग़ोश रही

  - Divya Jain
फिरवहीरातजोतन्हाईकेआग़ोशरही
इकउनीदीसीग़ज़लख़्वाबमेंमदहोशरही
हमसेवोअजनबीऔरउनसेथेअनजानेहम
ता-अबदयूँँहीमोहब्बतयेफ़रामोशरही
पर्दा-ए-चश्ममेंयादोंकेज़ख़ीरेपुर-शोर
झाँकतीउनसेजोतन्हाईवोख़ामोशरही
जबतलकपहुँचीवोमहफ़िलोंसेमहफ़िलोंमें
तबतलकमेरीवोरुस्वाईभीपुर-जोशरही
क्यूँँहोशर्मिंदावोइंसाँकेजराएमपरयूँँ
क्यूँँज़मींशबकीसियाहीमेंरिदा-पोशरही
आँखपेछाएहैंअरमानजोथेज़ेर-ए-दिल
दास्ताँहरयहाँहोकेधुआँरू-पोशरही
बातफिसलीथीजोकानोंमेंज़बाँसेलटकी
तौक़बनकेवोहीता-उम्रसर-ए-दोशरही
  - Divya Jain
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy