hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dipendra Singh 'Raaz'
mashwara ye hijr ka karna hai kyuuñ
mashwara ye hijr ka karna hai kyuuñ | मशवरा ये हिज्र का करना है क्यूँ
- Dipendra Singh 'Raaz'
मशवरा
ये
हिज्र
का
करना
है
क्यूँ
साफ़
ही
कह
दीजिए
मर
जाइए
- Dipendra Singh 'Raaz'
Download Sher Image
तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
Read Full
Ismail Raaz
Send
Download Image
71 Likes
काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
10 Likes
अब
यही
सोचते
रहते
हैं
बिछड़
कर
तुझ
से
शायद
ऐसे
नहीं
होता
अगर
ऐसा
करते
Asim Wasti
Send
Download Image
34 Likes
हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
Send
Download Image
4 Likes
नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
Read Full
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
58 Likes
वो
एक
शख़्स
जो
दिखने
में
ठीक-ठाक
सा
था
बिछड़
रहा
था
तो
लगने
लगा
हसीन
बहुत
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
27 Likes
ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
22 Likes
ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
Send
Download Image
33 Likes
बिछड़
कर
मुझ
सेे
तुझको
क्या
मिला
है
कि
जो
कुछ
था
वो
भी
खोना
पड़ा
है
गया
था
जिस
जगह
पर
छोड़
कर
तू
उसी
रस्ते
पे
दिल
अब
भी
खड़ा
है
Read Full
ATUL SINGH
Send
Download Image
22 Likes
हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
Read Full
Alankrat Srivastava
Send
Download Image
10 Likes
Read More
ना-मुकम्मल
फिर
हुई
मेरी
ग़ज़ल
शे'र
फिर
तन्हा
हुआ,
मेरी
तरह
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
ये
सोच
कर
के
कि
उसने
किया
है
याद
मुझे
मैं
मेरी
उँगलियों
पे
हिचकियों
को
गिनता
रहा
पलट
के
उसने
कराया
न
मुझको
चुप
लेकिन
तमाम
रात
मेरी
सिसकियों
को
गिनता
रहा
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
8 Likes
इश्क़
में
ख़ुद
को
मैं
बर्बाद
नहीं
कर
सकता
एक
औरत
के
बुढ़ापे
का
सहारा
हूँ
मैं
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
परिंदों
की
भी
फितरत
सच
कहूँ
औलाद
जैसी
है
निकल
आते
हैं
जब
पर
तो
शजर
को
छोड़
देते
हैं
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
2 Likes
काम
आती
नहीं
दवा
कोई
रोज़
देता
है
बद्दुआ
कोई
ख़ाली
कमरे
में
ऐसे
लगता
है
दे
रहा
है
मुझे
सदा
कोई
कौन
है
उस
तरफ़
कोई
भी
नहीं
मुझको
ऐसा
लगा
कि
था
कोई
मुझको
डर
है
न
पूछ
ले
मुझ
सेे
है
भला
शहर
में
तेरा
कोई
कॉल
करने
का
उसको
जब
सोचूंँ
याद
आता
है
वास्ता
कोई
दिल
मकाँँ
है
ये
जैसे
मुफ़्लिस
का
तोड़
जाता
है
बारहा
कोई
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Download Image
2 Likes
Read More
Subhan Asad
Anjum Saleemi
Siraj Faisal Khan
Zubair Ali Tabish
Swapnil Tiwari
Firaq Gorakhpuri
Aziz Nabeel
Jaan Nisar Akhtar
Ameer Minai
Zafar Gorakhpuri
Get Shayari on your Whatsapp
I Miss you Shayari
Sorry Shayari
Freedom Shayari
Charagh Shayari
Anjam Shayari