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Dipendra Singh 'Raaz'
kaam aati nahin davaa koi
kaam aati nahin davaa koi | काम आती नहीं दवा कोई
- Dipendra Singh 'Raaz'
काम
आती
नहीं
दवा
कोई
रोज़
देता
है
बद्दुआ
कोई
ख़ाली
कमरे
में
ऐसे
लगता
है
दे
रहा
है
मुझे
सदा
कोई
कौन
है
उस
तरफ़
कोई
भी
नहीं
मुझको
ऐसा
लगा
कि
था
कोई
मुझको
डर
है
न
पूछ
ले
मुझ
सेे
है
भला
शहर
में
तेरा
कोई
कॉल
करने
का
उसको
जब
सोचूंँ
याद
आता
है
वास्ता
कोई
दिल
मकाँँ
है
ये
जैसे
मुफ़्लिस
का
तोड़
जाता
है
बारहा
कोई
- Dipendra Singh 'Raaz'
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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अक्स-दर-अक्स
बिखरना
है
मुझे
जाने
क्या
टूट
गया
है
मुझ
में
Khalid Moin
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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अस्ल
में
पाया
ही
'दानिश'
तब
उसे
जब
उसे
खोने
का
डर
जाता
रहा
Madan Mohan Danish
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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नई
सुब्ह
पर
नज़र
है
मगर
आह
ये
भी
डर
है
ये
सहर
भी
रफ़्ता
रफ़्ता
कहीं
शाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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डर
मुझे
मेरी
मुहब्बत
एक
दिन
खो
जाएगी
यार
मुझको
लग
रहा
वो
ग़ैर
की
हो
जाएगी
मैं
सभी
वादे
पुराने
ही
निभाते
जाऊँगा
और
वो
जाकर
किसी
की
बाँह
में
सो
जाएगी
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Ravi 'VEER'
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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सितारा
ही
तो
कहती
थी
मुझे
तुम
दुआएंँ
माँग
लो
टूटा
हुआ
हूँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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अब
उस
गली
में
अमूमन
तो
मैं
नहीं
जाता
कभी
कभार
कोई
याद
खींच
लेती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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तेरी
फ़ितरत
का
मुझको
इल्म
है
सो
तेरे
तोहफ़े
अभी
खोले
नहीं
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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आए
सही
वो
आए
भले
देर
से
यहाँ
कितनी
तो
देर
लगती
है
अजमेर
से
यहाँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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एक
था
वक़्त
जब
आँखों
में
था
ख़्वाबों
का
हुजूम
अब
तो
इक
ख़्वाब
टटोले
से
नहीं
मिलता
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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