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Dipendra Singh 'Raaz'
kisi bewa ke chehre si nazar aati hai ab mujhko
kisi bewa ke chehre si nazar aati hai ab mujhko | किसी बेवा के चेहरे सी नज़र आती है अब मुझको
- Dipendra Singh 'Raaz'
किसी
बेवा
के
चेहरे
सी
नज़र
आती
है
अब
मुझको
परिंदों
को
उड़ा
कर
पेड़
की
तस्वीर
जो
ली
है
- Dipendra Singh 'Raaz'
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शाम
से
आँख
में
नमी
सी
है
आज
फिर
आप
की
कमी
सी
है
Gulzar
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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भीगीं
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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क्यूँँ
इक
तरफ़
निगाह
जमाए
हुए
हो
तुम
क्या
राज़
है
जो
मुझ
से
छुपाए
हुए
हो
तुम
Shakeel Badayuni
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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दुआएँ
भी
बहुत
माँगी,
तहज्जुद
भी
पढ़ें
हम
ने
फिर
आख़िर
में
समझ
आया,
ये
बातें
हैं
नसीबों
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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ग़मों
के
भँवर
में
फँसे
तो
ये
समझे
घड़ी
दो
घड़ी
की
ख़ुशी
भी
ख़ुशी
थी
Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
इक
गली
जिसे
छोड़
हुए
मुझे
बरसों
न
जाने
क्यूँ
मेरे
ख़्वाबों
में
रोज़
आती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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मुहब्बत
दूसरी
बारी
भी
हो
सकती
है
तुम
सेे
पर
यक़ीं
वापस
से
अब
तुम
पर
दोबारा
हो
नहीं
सकता
Dipendra Singh 'Raaz'
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उम्र
के
आख़िरी
दिनों
में
भी
तेरी
तस्वीर
साफ़
दिखती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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