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Dipendra Singh 'Raaz'
muhabbat doosri baari bhi ho sakti hai tumse par
muhabbat doosri baari bhi ho sakti hai tumse par | मुहब्बत दूसरी बारी भी हो सकती है तुम सेे पर
- Dipendra Singh 'Raaz'
मुहब्बत
दूसरी
बारी
भी
हो
सकती
है
तुम
सेे
पर
यक़ीं
वापस
से
अब
तुम
पर
दोबारा
हो
नहीं
सकता
- Dipendra Singh 'Raaz'
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यक़ीं
कैसे
करूँँ
वादों
पे
तेरे
साथ
रहने
के
यही
वादे
किए
होंगे
उन्होंने
भी
जो
बिछड़े
हैं
Priya Dixit
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चाहिए
ख़ुद
पे
यक़ीन-ए-कामिल
हौसला
किस
का
बढ़ाता
है
कोई
Shakeel Badayuni
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थी
इक
वक़्त
अब
शा'इरी
बस
बची
है
यक़ीं
करना
मुझ
में
मुहब्बत
नहीं
है
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Parul Singh "Noor"
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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ज़ख़्म
दिल
के
भरे
नहीं
अब
तक
और
इक
दर्द
फिर
हरा
कर
लूँ
अब
भरोसा
नहीं
किसी
का
पर
तू
कहे
तो
यक़ीं
तिरा
कर
लूँ
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Harsh saxena
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ऐसे
रिश्ते
का
कोई
अस्तित्व
नहीं
हरदम
जिस
में
यक़ीं
दिलाना
पड़ता
है
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SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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या
तेरे
अलावा
भी
किसी
शय
की
तलब
है
या
अपनी
मोहब्बत
पे
भरोसा
नहीं
हम
को
Shahryar
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तुम्हारे
पाँव
के
नीचे
कोई
ज़मीन
नहीं
कमाल
ये
है
कि
फिर
भी
तुम्हें
यक़ीन
नहीं
Dushyant Kumar
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हिज्र
के
मौसम
में
और
क्या
काम
है
रोज़
पलकों
को
भिगोने
के
सिवा
पूछ
बैठी
एक
दिन
फिर
वो
मुझे
और
कुछ
आता
है
रोने
के
सिवा
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Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम
न
टूटो
कभी
भी
इसलिए
पत्थर
है
कहा
मैं
तुम्हें
फूल
जो
कहता
तो
बिखर
जाती
तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
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एक
वो
है
जो
कभी
हो
न
सका
मेरा
और
एक
मैं
हूँ
जो
सिवा
उसके
किसी
का
न
हुआ
Dipendra Singh 'Raaz'
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दर्द-ए-दिल
की
है
वजह
क्या
ये
पता
किसने
किया
मेरे
ज़ख़्मों
को
छू
के
फिर
से
हरा
किसने
किया
Dipendra Singh 'Raaz'
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छोड़
दी
दर्द
में
भी
तुमने
शिकायत
करनी
आख़िरश
सीख
ही
ली
तुमने
मुहब्बत
करनी
Dipendra Singh 'Raaz'
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