gham hamaara gulaab ho jaa.e | ग़म हमारा गुलाब हो जाए

  - Dinesh Thakur
ग़महमारागुलाबहोजाए
ज़िंदगीला-जवाबहोजाए
यादनेहर्फ़हर्फ़घेराहै
गरलिखूँतोकिताबहोजाए
दुश्मनोंकीतरफ़भीजाएँगे
दोस्तोंसेहिसाबहोजाए
इम्तिहाँलेबे-क़रारीका
मेरेख़तकाजवाबहोजाए
आपनाहक़ख़ुदासडरतेहैं
शैख़साहबशराबहोजाए
तेरेकूचेमेंकेलगताहै
जैसेमुफ़्लिसनवाबहोजाए
ख़ुद-परस्तीअनाहीकाफ़ीहै
रुख़ज़राबे-नक़ाबहोजाए
मैंनेदेखाकितूहैपहलूमें
अबमुजस्समयेख़्वाबहोजाए
  - Dinesh Thakur
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